Tata Communications ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 FY 26) के रिजल्ट्स जारी किए हैं. इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट 27% घटकर ₹613 करोड़ रह गया, जबकि कुल रेवेन्यू में मामूली 6.5% की बढ़त हुई और यह ₹6100 करोड़ तक पहुंचा.
कंपनी के सीईओ अमूर लक्ष्मी नारायण ने बताया कि सितंबर 2025 में रेड सी में अंडरसी केबल्स कटने से इंटरनेट कनेक्टिविटी और डेटा ट्रैफिक पर असर पड़ा. इस वजह से रेवेन्यू घटा और कॉस्ट बढ़ गई. उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं अब न्यू नॉर्मल बन चुकी हैं, क्योंकि पिछले दो सालों में केबल कट्स की संख्या बढ़ी है.
Tata Communications दुनिया के सबसे बड़े सबसी केबल नेटवर्क्स में से एक को ऑपरेट करती है, जो 5 लाख किलोमीटर से ज्यादा लंबा है और एशिया, यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका को जोड़ता है. यही नेटवर्क आपके WhatsApp मैसेज, बैंक ट्रांजैक्शन और Netflix स्ट्रीम्स को कैरी करता है.
कंपनी का फोकस टेलीकॉम से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की ओर
टाटा कम्युनिकेशंस अब सिर्फ टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी नहीं रहना चाहती. कंपनी अब खुद को एक डिजिटल फैब्रिक इनेबलर में बदल रही है.
इस समय कंपनी के दो मुख्य सेगमेंट हैं कोर कनेक्टिविटी और डिजिटल पोर्टफोलियो.
कोर कनेक्टिविटी कंपनी के रेवेन्यू का लगभग 42% हिस्सा है, लेकिन यह सेगमेंट सिर्फ 1% की दर से बढ़ रहा है. दूसरी ओर, डिजिटल पोर्टफोलियो जिसमें क्लाउड सर्विस, IoT प्लेटफॉर्म और कोलैबोरेशन टूल्स शामिल हैं, ने 14.9% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की और ₹2542 करोड़ तक पहुंचा.
कंपनी के EBITDA मार्जिन में भी सुधार दिख रहा है. पहले यह 18% तक गिर चुका था, लेकिन अब कंपनी का लक्ष्य है कि अगले दो-तीन साल में इसे 23% तक बढ़ाया जाए.
AI में निवेश और नई तकनीक की दिशा में कदम
Artificial Intelligence (AI) के दौर में Tata Communications भी पीछे नहीं है. कंपनी ने लगभग 1000 GPUs खरीदे हैं, जिनकी कीमत करीब $30–40 मिलियन डॉलर है. हालांकि यह निवेश Google और TCS जैसे दिग्गजों की तुलना में छोटा है, लेकिन कंपनी की रणनीति अलग है.
कंपनी AI Development में कंपटीशन नहीं बल्कि कोलैबोरेशन पर ध्यान दे रही है. TCS, Microsoft और Google जैसे बड़े प्लेयर्स के साथ मिलकर यह कंपनी डेटा सेंटर कनेक्टिविटी और क्लाउड सर्विसेज को मजबूत कर रही है.
कंपनी का एआई प्लेटफॉर्म GPU as a Service मॉडल पर काम करता है, जिससे छोटे बिजनेस भी GPU किराए पर लेकर AI मॉडल चला सकते हैं. कंपनी के सीईओ का कहना है कि GPU का लगभग 80% इस्तेमाल मॉडल रनिंग यानी इंफेरेंस के लिए होगा, न कि ट्रेनिंग के लिए.
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पुरानी यूनिट्स से बाहर निकलकर फ्यूचर टेक पर फोकस
टाटा कम्युनिकेशंस अपने कमजोर बिजनेस सेक्शन को धीरे-धीरे बंद कर रही है. कंपनी ने हाल ही में ATM सॉल्यूशन बिजनेस और NetFoundry वेंचर को बेच दिया है. सीईओ का कहना है कि कंपनी अब पुराने सोच के साथ आगे नहीं बढ़ सकती.
साथ ही, कंपनी प्राइवेट 5G नेटवर्क्स पर भी ध्यान दे रही है. कंपनी का कहना है कि Jio और Airtel जैसे पब्लिक 5G नेटवर्क इंडस्ट्रियल ऑपरेशंस के लिए अभी भरोसेमंद नहीं हैं. ऐसे में Tata Communications LORA WAN और Wi-Fi 6 जैसी तकनीक के जरिए अपने IoT सॉल्यूशंस को बेहतर बना रही है.
कुल मिलाकर, टाटा कम्युनिकेशंस अपने बिजनेस मॉडल को तेजी से बदल रही है. कंपनी का लक्ष्य है कि वह भारत के बढ़ते AI और Digital Revolution का एक जरूरी हिस्सा बने. अगर कंपनी अपनी रणनीति सफलतापूर्वक लागू कर पाती है, तो यह आने वाले वर्षों में इंडिया की टेक ग्रोथ स्टोरी का एक अहम अध्याय साबित हो सकती है.
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