भारत में क्रिप्टो करेंसी को लेकर अब तक काफी भ्रम था. सरकार ने इसे न तो मान्यता दी थी और न ही पूरी तरह बैन किया था. लेकिन अब मद्रास हाईकोर्ट के एक अहम फैसले ने स्थिति को काफी हद तक साफ कर दिया है. अदालत ने कहा है कि क्रिप्टो करेंसी Cryptocurrency एक डिजिटल एसेट है. यानी इसे खरीदा, बेचा और अपने पास रखा जा सकता है.
क्या है क्रिप्टो करेंसी और क्यों है चर्चा में
दुनिया भर में क्रिप्टो करेंसी का चलन तेजी से बढ़ा है. कई लोगों ने इससे अच्छा पैसा कमाया है, लेकिन इसमें खतरा भी बड़ा है. भारत में सरकार ने इसे अब तक न तो लीगल करेंसी माना है और न ही प्रतिबंधित किया है. क्रिप्टो एक वर्चुअल करेंसी है, जिसे कोई सरकार या बैंक नहीं चलाता. यह पूरी तरह ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर काम करती है.
2009 में शुरू हुई Bitcoin पहली क्रिप्टो करेंसी थी. इसके बाद 2015 में Ethereum आई, जो आज भी दूसरी सबसे लोकप्रिय क्रिप्टो है. भारत में लोग WazirX या CoinDEX जैसे ऐप से अकाउंट बनाकर क्रिप्टो खरीदते हैं. वे UPI या बैंक से पैसे भेजकर बिटकॉइन या एथेरियम जैसी करेंसी खरीद सकते हैं. लेकिन इसकी कीमतें बहुत तेजी से बदलती हैं, इसलिए जोखिम हमेशा बना रहता है.
मद्रास हाईकोर्ट का फैसला क्यों है खास
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि क्रिप्टो करेंसी एक डिजिटल प्रॉपर्टी है, कोई सट्टा नहीं. अदालत ने बताया कि इसे “Virtual Digital Property” के रूप में टैक्स कानून के तहत मान्यता मिली है. यह केस रुति कुमारी नाम की महिला की याचिका पर आया था. उन्होंने जनवरी 2024 में WazirX पर करीब ₹19.98 लाख की क्रिप्टो खरीदी थी. जुलाई में साइबर हमले के बाद उनका अकाउंट फ्रीज कर दिया गया और क्रिप्टो गायब हो गई.
WazirX की पैरेंट कंपनी जैन माय लैब्स ने दलील दी कि मामला भारत में नहीं, सिंगापुर में arbitration से हल होना चाहिए. लेकिन अदालत ने यह बात खारिज कर दी. कोर्ट ने आदेश दिया कि जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, शिकायतकर्ता ₹9.56 लाख बैंक गारंटी या एस्क्रो अकाउंट में जमा करें.
टैक्स नियम और सरकार की नई डिजिटल करेंसी
भारत में क्रिप्टो पर टैक्स नियम सख्त हैं. सरकार ने क्रिप्टो से हुई कमाई पर 30% टैक्स और 1% TDS लगाने का नियम बनाया है. नुकसान होने पर भी टैक्स देना पड़ता है. सरकार का मानना है कि यह नियम लोगों को जोखिम भरे निवेश से बचाने के लिए जरूरी है.
हाल ही में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार जल्द अपनी डिजिटल करेंसी लॉन्च करेगी. यह करेंसी RBI की निगरानी में चलेगी और पूरी तरह सुरक्षित होगी. इससे डिजिटल लेनदेन पर सरकार की गारंटी मिलेगी. मद्रास हाईकोर्ट का यह फैसला क्रिप्टो निवेशकों के लिए राहत की खबर है. अब क्रिप्टो करेंसी को डिजिटल एसेट के रूप में कानूनी पहचान मिली है.
हालांकि, सरकार की पॉलिसी पर अभी और स्पष्टीकरण का इंतजार है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत क्या क्रिप्टो करेंसी को आधिकारिक मान्यता देने की दिशा में आगे बढ़ेगा.




