पजेशन से पहले बिल्डर ने मांगे लाखों? समझिए कॉर्पस फंड और एडवांस मेंटेनेंस का पूरा खेल!

एक परिवार को बिल्डर से नए अपार्टमेंट की चाबी लेते हुए दिखाता दृश्य, जो कॉर्पस फंड और मेंटेनेंस चार्ज की समझ पर आधारित है
कॉर्पस फंड और एडवांस मेंटेनेंस चार्ज में क्या फर्क है

नया घर खरीदना हर किसी के लिए बड़ा फैसला होता है. लेकिन जब पजेशन का समय आता है, तो खरीदारों को डाउन पेमेंट GST और रजिस्ट्रेशन फीस के अलावा कई और रकम देनी पड़ती है. इन्हीं में दो नाम अक्सर सुनाई देते हैं कॉर्पस फंड और एडवांस मेंटेनेंस फंड. ज्यादातर लोग इन्हें समझ नहीं पाते और सोचते हैं कि जब हर महीने मेंटेनेंस दे रहे हैं, तो फिर कॉर्पस फंड क्यों देना चाहिए? आइए इसे आसान भाषा में समझें.

क्या होता है कॉमन एरिया मेंटेनेंस फंड

हर सोसाइटी में सुविधाओं को चलाने के लिए हर महीने जो रकम ली जाती है, उसे कॉमन एरिया मेंटेनेंस CAM कहा जाता है. इसमें सिक्योरिटी गार्ड की सैलरी, सफाई कर्मचारियों का वेतन, लिफ्ट और पार्किंग की बिजली पार्क लॉबी और गार्डन की देखभाल जैसे खर्च शामिल होते हैं. साथ हीलिफ्ट की सर्विसिंग कचरा उठाने पानी के पंप प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन की फीस भी इसी में आती है. यह रकम हर महीने इसलिए ली जाती है ताकि सोसाइटी की सभी सुविधाएं सही तरह से चलती रहें.

कॉर्पस फंड क्या है और क्यों लिया जाता है

कॉर्पस फंड एक बार लिया जाने वाला फंड होता है, जो सोसाइटी की बड़ी जरूरतों या आपात स्थिति के लिए रखा जाता है. बिल्डर यह रकम पजेशन के समय सभी खरीदारों से इकट्ठा करता है और बाद में इसे रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन RWA या अपार्टमेंट ओनर एसोसिएशन AOA को सौंप देता है. इस फंड को सोसाइटी की सेविंग समझा जा सकता है.

इसका इस्तेमाल 5 से 10 साल बाद होने वाले बड़े कामों में किया जाता है, जैसे बिल्डिंग की पेंटिंग, पुरानी लिफ्ट को बदलना, मेन वॉटर पंप या STP की मरम्मत करना आदि अगर यह फंड पहले से न हो तो भविष्य में जब बड़ा खर्च आएगा तो हर फ्लैट मालिक से एक साथ 40-50 हजार रुपए तक वसूले जा सकते हैं. इसलिए कॉर्पस फंड एक तरह से सोसाइटी के भविष्य की सुरक्षा राशि होता है.

पूरा हिसाब ऐसे समझें

मान लीजिए आपका फ्लैट 1500 स्क्वायर फीट का है और बिल्डर 3 रुपए प्रति स्क्वायर फीट के हिसाब से मेंटेनेंस लेता है. तो हर महीने आपको ₹4,500 देने होंगे. अगर बिल्डर दो साल का एडवांस मांगता है तो ₹4,500 × 24 = ₹1,08,000 रुपए देने होंगे. इसके अलावा, बिल्डर ₹2,00,000 का कॉर्पस फंड भी अलग से लेता है. इस तरह, घर का पजेशन लेते वक्त आपको कुल ₹3,08,000 रुपए ₹1,08,000 एडवांस मेंटेनेंस + ₹2,00,000 कॉर्पस फंड देना होगा.

दोनों फंड का फर्क जानें

एडवांस मेंटेनेंस फंड वह रकम है जो आप आने वाले महीनों की सुविधाओं के लिए पहले से दे देते हैं. वहीं कॉर्पस फंड भविष्य में आने वाले बड़े खर्चों के लिए रिजर्व के रूप में रखा जाता है. मेंटेनेंस से सोसाइटी चलती है, जबकि कॉर्पस फंड से वह मजबूत और सुरक्षित रहती है. अगर आप नया घर खरीद रहे हैं, तो बिल्डर से साफ पूछें कि दोनों फंड की रकम कहां और कैसे इस्तेमाल होगी. सही जानकारी आपको भविष्य में किसी परेशानी से बचा सकती है और आपके निवेश को सुरक्षित रखती है.

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