भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर चर्चा लगातार बढ़ रही है निवेशक और एक्सचेंज लंबे समय से उम्मीद कर रहे थे कि देश में जल्द कोई साफ नियम आएगा लेकिन हाल ही में भारतीय और बोर्ड (सेबी) ने एक आरटीआई के जवाब में कहा कि फिलहाल क्रिप्टो एसेट्स उसकी सीमा में नहीं आते इस बयान के बाद निवेशकों के मन में कई सवाल खड़े हो गए हैं।
दुनिया भर में जहां अमेरिका और यूरोप क्रिप्टो को लेकर बड़े कदम उठा रहे हैं, वहीं भारत में स्थिति अभी तक अस्पष्ट है सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले समय में इस मार्केट को कौन नियंत्रित करेगा और निवेशकों की सुरक्षा कैसे होगी।
बिटकॉइन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ईटीएफ की तेजी
पिछले कुछ दिनों से बिटकॉइन की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है हाल ही में यह $18,900 से चढ़कर $14,600 तक पहुंचा, लेकिन उसके बाद इसमें हल्की गिरावट आई जानकारों का कहना है कि $11,000 से $12,000 का स्तर इस समय अहम सपोर्ट है अगर यह स्तर टूटता है तो बाजार में और कमजोरी आ सकती है।
उधर अमेरिका में क्रिप्टो निवेशकों के लिए राहत भरी खबर आई है वहां की सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने क्रिप्टो ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) की मंजूरी की प्रक्रिया आसान कर दी है पहले कंपनियों को 240 दिन इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब सिर्फ S1 फाइलिंग के आधार पर मंजूरी मिल सकेगी इससे ईटीएफ जल्दी अप्रूव होने की संभावना है।
सोलाना, एक्सआरपी और लाइटकॉइन ईटीएफ की उम्मीदें
ब्लूमबर्ग के एक्सपर्ट्स का मानना है कि अक्टूबर में तीन बड़े कॉइन सोलाना, एक्सआरपी और लाइटकॉइन के ईटीएफ को मंजूरी मिलने की 95 फीसदी संभावना है अगर ऐसा होता है तो अमेरिकी निवेशकों के लिए नया मौका खुलेगा और क्रिप्टो मार्केट को बड़ा बूस्ट मिल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईटीएफ आने से बड़े संस्था निवेशक भी इस क्षेत्र में आएंगे इससे बाजार को स्थिरता मिलेगी और क्रिप्टो को लंबे समय तक टिकाऊ निवेश विकल्प के तौर पर जगह मिलेगी।
भारत में सेबी और आरबीआई की अलग सोच
भारत में क्रिप्टो को लेकर अब तक कोई साफ नियम नहीं बना है आरटीआई के जवाब में सेबी ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी उसके दायरे में नहीं आती यानी फिलहाल वह इस पर कोई निगरानी नहीं करेगा दूसरी ओर, रिजर्व बैंक (आरबीआई) लगातार चेतावनी दे रहा है कि क्रिप्टो देश की वित्तीय व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है।
निवेशक और एक्सचेंज मानते हैं कि भारत को जल्द एक स्वतंत्र नियामक सिस्टम बनाना चाहिए फिलहाल सरकार टैक्स तो वसूल रही है, लेकिन निवेशकों की सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है अगर सेबी और आरबीआई की भूमिकाएं साफ नहीं की गईं, तो भारत का क्रिप्टो मार्केट कमजोर हो सकता है।
वज़ीरएक्स विवाद और कोर्ट में सुनवाई
इस बीच वज़ीरएक्स को लेकर विवाद जारी है कुछ निवेशकों का कहना है कि उनके बिटकॉइन और एक्सआरपी सुरक्षित हैं और उन्हें पूरी तरह वापस मिलना चाहिए वहीं जिन निवेशकों के एथेरियम टोकन चोरी हुए, उनके लिए कंपनी ने अलग प्लान बनाया है इस मुद्दे पर सिंगापुर की अदालत 3 अक्टूबर को सुनवाई करेगी।
निवेशकों का कहना है कि जब तक भारत में क्रिप्टो पर स्पष्ट कानून नहीं बनते, तब तक इस तरह के विवाद सामने आते रहेंगे।
भारतीय कंपनियों की रणनीति और नए कदम
अमेरिका की माइक्रोस्ट्रैटेजी की तरह भारतीय कंपनी जेटकिंग ने भी बिटकॉइन में निवेश की योजना बनाई थी कंपनी चाहती थी कि वह अपने शेयर बेचकर बिटकॉइन खरीदे, लेकिन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया नियामकों का कहना है कि कंपनियां सीधे शेयर बेचकर क्रिप्टो में निवेश नहीं कर सकतीं, हालांकि अपने मुनाफे से ऐसा करने पर कोई रोक नहीं है।
इसके अलावा, महाराष्ट्र सरकार ने क्रिप्टो से जुड़े साइबर क्राइम की जांच के लिए एक खास सेल बनाई है इसका मकसद है क्रिप्टो से जुड़े अपराधों की जांच करना और ठगी रोकना विशेषज्ञ इसे निवेशकों की सुरक्षा की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं।
क्रिप्टोकरेंसी आज दुनिया के सबसे चर्चित निवेश विकल्पों में से एक है अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में जहां इसे मुख्यधारा में लाने की कोशिश हो रही है, वहीं भारत में अब भी नियम साफ नहीं हैं सेबी के बयान से यह साफ है कि फिलहाल क्रिप्टो पर उसकी कोई भूमिका नहीं है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत क्या सेबी को यह जिम्मेदारी देगा या इसके लिए कोई नई संस्था बनाई जाएगी निवेशकों की सबसे बड़ी मांग यही है कि क्रिप्टो के लिए एक सुरक्षित और सिस्टम बनाया जाए, ताकि वे भरोसे के साथ निवेश कर सकें।
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