अमेरिकी टैरिफ का असर: RBI गवर्नर का भारत की अर्थव्यवस्था पर बयान

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का बयान अमेरिकी टैरिफ पर
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अमेरिकी टैरिफ के असर पर बताया अपना दृष्टिकोण

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाए गए 50% टैरिफ का असर भारत की अर्थव्यवस्था और व्यापार पर पड़ सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि बढ़ती विश्व ट्रेड तनाव के कारण 2025-26 की दूसरी छमाही में आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी हो सकती है. मल्होत्रा ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत और टिकाऊ है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि RBI हर स्थिति के लिए तैयार है और अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहा है.


अमेरिकी टैरिफ से निर्यातकों पर दबाव

अमेरिका ने हाल ही में भारतीय निर्यात पर 50% शुल्क लगा दिया है. इनमें से 25% टैरिफ को जवाबी कर बताया गया है, जबकि बाकी 25% भारत द्वारा रूस से क्रूड ऑयल खरीदने के चलते लगाए गए हैं. इस फैसले से भारत के निर्यात क्षेत्र पर सीधा असर पड़ सकता है.

RBI की अक्टूबर 2025 की मौद्रिक नीति में रेपो दर को 5.5% पर बनाए रखा गया. यह इस साल तीसरी बार है जब दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया. अब तक 2025 में कुल 1% की कटौती की जा चुकी है. मल्होत्रा ने बताया कि हाल ही में GST दरों में की गई कमी अमेरिकी टैरिफ के असर को पूरी तरह कम नहीं कर पाएगी. RBI ने आर्थिक अनुमान बनाते समय 50% टैरिफ को ध्यान में रखा है ताकि नीतियों और बाजार के बीच संतुलन बना रहे.


निवेशकों और व्यापारियों के लिए RBI की रणनीति

गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि RBI का ध्यान आर्थिक स्थिरता और विकास पर है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है और आने वाले समय में टैरिफ में कमी की संभावना है. फिलहाल, RBI ने मौजूदा 50% टैरिफ को ध्यान में रखकर रणनीति तैयार की है. इस कदम का उद्देश्य बाजार को स्थिर रखना और निवेशकों को भरोसा देना है कि भारत की नीतियां मजबूत हैं.


भारत अमेरिका व्यापार में चुनौतियां

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत जारी है, लेकिन कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं. सबसे बड़ी चुनौती भारत के रूस से तेल खरीद और अमेरिकी कृषि व डेयरी सेक्टर में प्रवेश को लेकर है. इन मतभेदों के कारण समझौते पर अंतिम सहमति अभी नहीं बन पाई है. RBI गवर्नर ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ का असर भारत की GDP ग्रोथ पर दिख सकता है. दूसरी तिमाही में विकास दर के अनुमान में जो कमी की गई है, वह इन्हीं टैरिफ प्रभावों के कारण है. उन्होंने कहा कि नीति निर्माता और व्यापारी आने वाले समय में सतर्क रहकर अपनी योजनाएं बनाएं.


RBI की तैयारी

मल्होत्रा ने कहा कि दुनिया भर में बढ़ती आर्थिक अस्थिरता और ट्रेड नीतियों में बदलाव को देखते हुए सतर्क रहना जरूरी है. RBI लगातार ऐसे कदम उठा रहा है जो भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित और मजबूत बनाए रखें. RBI की मौजूदा नीतियां निवेशकों को यह संदेश देती हैं कि स्थिर और सोच-समझकर बनाई गई योजनाएं ही आगे के विकास की कुंजी हैं. मौजूदा रणनीति बाजार को संतुलित रखने और अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करने में मदद करेगी.


लंबी अवधि में भारत की आर्थिक दिशा

अमेरिका के टैरिफ और विश्व व्यापारि दबाव का असर भारत की आर्थिक वृद्धि पर लंबे समय तक रह सकता है. RBI की मौद्रिक नीति और सक्रिय रणनीति इन चुनौतियों का सामना करने में मदद कर सकती है. भारत की निर्यात नीतियों में लचीलापन और दुनिया के बाजारों के साथ तालमेल बनाना ही आगे बढ़ने का रास्ता होगा. RBI के सतर्क कदम आने वाले समय में भारत की आर्थिक मजबूती को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे.

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