श्रीमद् भागवत गीता सिर्फ एक धार्मिक किताब नहीं, बल्कि जिंदगी को सही दिशा दिखाने वाली सबसे बड़ी सीख है. इसमें बताया गया है कि मुश्किल हालात में भी सही सोच और सही काम इंसान की ताकत बनते हैं. 18 अध्याय और 720 श्लोकों में लिखी यह गीता दुनिया की सबसे महान Spiritual Books में गिनी जाती है.
आत्मा और जीवन का असली मतलब
गीता का मशहूर श्लोक है “नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि, नैनं दहति पावकः.” इसका मतलब है कि आत्मा को कोई हथियार काट नहीं सकता, न आग जला सकती है, न पानी भिगो सकता है और न हवा सुखा सकती है. भगवान कृष्ण ने बताया कि आत्मा कभी खत्म नहीं होती, वह हमेशा रहती है. एक और श्लोक में कृष्ण कहते हैं “हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं, जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्.” यानि अगर युद्ध में वीरगति पाओगे तो स्वर्ग मिलेगा और अगर जीतोगे तो धरती के सुख मिलेंगे. इसका मतलब है कि इंसान को अपना काम करते रहना चाहिए और उसके नतीजों की चिंता नहीं करनी चाहिए. यही Karma Yoga का असली संदेश है.
जब अधर्म बढ़ता है, तब भगवान धरती पर आते हैं
गीता का सबसे प्रसिद्ध श्लोक है “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत.” इसका मतलब है कि जब भी बुराई बढ़ती है और अच्छाई कम होती है, तब भगवान धरती पर आते हैं. यह बात सिखाती है कि हर युग में सच्चाई की जीत और बुराई का अंत होता है. भगवान कृष्ण आगे कहते हैं “परित्राणाय साधूनां, विनाशाय च दुष्कृताम.” यानि अच्छे लोगों की रक्षा और बुरे कर्म करने वालों के विनाश के लिए वे हर युग में जन्म लेते हैं. यही वजह है कि गीता को Dharma and Justice की सबसे बड़ी शिक्षा माना गया है.
कर्म योग बिना स्वार्थ के काम करने की राह
गीता का एक और बड़ा उपदेश है “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन.” इसका अर्थ है कि इंसान को सिर्फ अपने काम पर ध्यान देना चाहिए, न कि उसके फल पर. जब हम बिना स्वार्थ के काम करते हैं, तो मन को शांति और आत्मा को सुकून मिलता है. श्रीकृष्ण कहते हैं कि जब इंसान ज़रूरत से ज़्यादा इच्छाओं में फंस जाता है, तो वह गुस्से और उलझन में गलत फैसले लेने लगता है. लेकिन जो व्यक्ति संयम और श्रद्धा से काम करता है, वह असली खुशी यानी Inner Peace पा लेता है.
गीता का आखिरी और सबसे असरदार संदेश है “सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज.” यानि सब कुछ छोड़कर भगवान की शरण में आओ, वे सभी पापों से मुक्ति दिलाएंगे. इससे यही सीख मिलती है कि हमें विश्वास, भक्ति और सही कर्म के रास्ते पर चलना चाहिए. आज के समय में भी श्रीमद् भागवत गीता उतनी ही ज़रूरी है, क्योंकि यह सिखाती है कि असली जीत बाहर की नहीं, बल्कि अंदर की शांति और समझ में होती है.
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