सरकारी कंपनी ड्रेजिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड – DCIL ने देश के समुद्री सेक्टर में बड़ा ऐलान किया है. कंपनी ने ₹17,645 करोड़ के 22 MoU साइन किए हैं. ये समझौते इंडिया मैरी टाइम वीक 2025 के दौरान हुए जो 27 से 31 अक्टूबर तक मुंबई में आयोजित हुआ था. कंपनी ने इसकी जानकारी 1 नवंबर को दी. DCIL ने बताया कि इन डील्स से आने वाले सालों में भारत के पोर्ट और शिपिंग सेक्टर को बड़ी मजबूती मिलेगी इस दौरान कंपनी ने 16 बड़ी संस्थाओं के साथ हाथ मिलाया.
देशभर के कई पोर्ट्स के साथ साझेदारी
DCIL इस समय विशाखापट्टनम पोर्ट अथॉरिटी VPA पारादीप पोर्ट अथॉरिटी PPA जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी JNPA और दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी DPA के साथ मिलकर काम कर रही है. ये सभी पोर्ट्स पोर्ट्स शिपिंग एंड वाटरवेज मंत्रालय MoPSW के तहत आते हैं. DCIL ने अपने प्रमोटर पोर्ट्स के अलावा श्याम प्रसाद मुखर्जी पोर्ट कोलकाता कोचीन पोर्ट चेन्नई पोर्ट और मुंबई पोर्ट के साथ भी अहम साझेदारी की है. इन MoUs के तहत अगले दो से पांच साल तक देशभर में ड्रेजिंग यानी पोर्ट्स की गहराई बढ़ाने और सफाई का काम किया जाएगा. इन समझौतों से भारत के समुद्री कारोबार को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है. और देश के पोर्ट्स की सुविधाएं और बेहतर होंगी
आत्मनिर्भर भारत मिशन में बड़ा कदम
आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए DCIL ने कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ एक नया समझौता किया है, इसके तहत ड्रेजर समुद्री खुदाई मशीन का निर्माण और मरम्मत अब भारत में ही की जाएगी इससे विदेशी मशीनों पर निर्भरता घटेगी और देश में रोजगार के नए मौके बनेंगे इसके साथ ही DCIL ने एनएमडीसी अबू धाबी के साथ भी साझेदारी की है, इस डील का मकसद काम की क्षमता बढ़ाना और ड्रेजिंग सेक्टर को और मजबूत बनाना है इससे भारत की पहचान ग्लोबल समुद्री मार्केट में और भी मजबूत होगी
टेक्नोलॉजी और मेड इन इंडिया इक्विपमेंट्स पर फोकस
DCIL ने भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड BEMLके साथ भी समझौता किया है, इसका उद्देश्य ड्रेजिंग में इस्तेमाल होने वाले स्पेयर पार्ट्स को भारत में ही बनाना है. इससे देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी कंपनी ने IHC के साथ भी समझौता किया है. इसके तहत पुराने ड्रेजर्स को नए आधुनिक उपकरणों से अपग्रेड किया जाएगा ताकि उनका बेहतर इस्तेमाल हो सके, इस पहल से काम की रफ्तार और क्वालिटी दोनों में सुधार आएगा.
शेयर में हल्की बढ़त
शेयर बाजार में DCIL के शेयर में शुक्रवार को हल्की तेजी रही शेयर 0.76% बढ़कर 738.35 रुपये पर बंद हुआ हालांकि, पिछले एक साल में कंपनी के शेयर की कीमत में लगभग 27.64% की गिरावट दर्ज की गई है. इतने बड़े समझौते कंपनी के भविष्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं. इससे कंपनी की कमाई और विकास दोनों में सुधार आने की संभावना है. इन 22 समझौतों के साथ DCIL ने यह साफ किया है कि वह देश के पोर्ट्स को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कमिटेड है. कंपनी के ये कदम भारत को आने वाले वर्षों में समुद्री कारोबार के क्षेत्र में मजबूत स्थिति में ला सकते हैं. DCIL का लक्ष्य है कि भारतीय बंदरगाहों को उच्च स्तर की सेवाओं नई तकनीक और घरेलू उत्पादन से सशक्त बनाया जाए ताकि देश को विश्व स्तर पर नई पहचान मिले.
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