भारत में ऑनलाइन शॉपिंग का सबसे बड़ा सीजन शुरू हो चुका है. Flipkart की Big Billion Days और Amazon की Great Indian Festival इस बार भी चर्चा में हैं. पिछले साल इन सेल्स में सिर्फ एक हफ्ते में भारतीयों ने लगभग 6.5 अरब डॉलर खर्च किए थे. यह रकम भूटान की पूरी GDP से भी ज्यादा है. इस साल कहानी थोड़ी अलग है. पहली बार Flipkart और Amazon अपने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स Flipkart Minutes और Amazon Now को भी इन सेल्स में शामिल कर रहे हैं. इसका मतलब है कि Blinkit, Zepto और Instamart जैसी फास्ट डिलीवरी कंपनियों को अब सीधी टक्कर मिलने वाली है.
फेस्टिव सेल में अब बड़ी खरीदारी और ग्रोसरी दोनों
पहले फेस्टिव सेल का मतलब था मोबाइल, टीवी और फैशन प्रोडक्ट्स पर भारी छूट. लेकिन इस बार Flipkart और Amazon ग्राहकों को ग्रोसरी और रोजमर्रा की जरूरत का सामान भी मिनटों में पहुंचाएंगे. Flipkart Minutes अब 19 शहरों में 400 से ज्यादा डार्क स्टोर्स से काम कर रहा है. वहीं Amazon Now फिलहाल सिर्फ दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में उपलब्ध है. इससे दोनों कंपनियों का लक्ष्य Blinkit, Instamart और Zepto के कस्टमर बेस में हिस्सेदारी बढ़ाना है.
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Blinkit और Zepto के लिए बड़ी चुनौती
Blinkit, Zepto और Instamart ने भारत में फास्ट डिलीवरी को लोकप्रिय बनाया. लेकिन इन कंपनियों की सबसे बड़ी कमजोरी है नुकसान में चलना और निवेशकों पर निर्भर रहना. वहीं Amazon और Flipkart के पास बड़े संसाधन हैं. Walmart और Amazon जैसी कंपनियों की मदद से इनका मार्केट वैल्यू 3 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा है. इनके पास पहले से ही मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और भरोसेमंद ग्राहक आधार मौजूद है. अब इन्हें बस इसे और तेज़ बनाना है.
Prime और Flipkart Plus से मिलेगा फायदा
Amazon के Prime और Flipkart के Plus जैसे लॉयल्टी प्रोग्राम पहले से ही ग्राहकों को जोड़कर रखते हैं. अब अगर क्विक डिलीवरी इन प्लेटफॉर्म्स में जुड़ जाती है, तो ग्राहक इन्हें और पसंद करेंगे. कल्पना कीजिए, आप Flipkart से फोन ऑर्डर करें और Flipkart Minutes आपको उसी समय चार्जर और स्नैक्स 10 मिनट में पहुंचा दे. या Amazon Prime मेंबर हों और वहीं से ग्रोसरी मंगवा लें. भरोसे और सुविधा की वजह से ग्राहक आसानी से इन प्लेटफॉर्म्स पर टिकेंगे.
जीत आसान नहीं, असली टेस्ट स्पीड और लागत का
क्विक कॉमर्स जितना आसान लगता है, उतना नहीं है. 50 रुपये का स्नैक डिलीवर करना कभी-कभी 500 रुपये के प्रोडक्ट जितना महंगा पड़ता है. साथ ही. Blinkit और Zepto इस खेल में काफी तेज़ हो चुके हैं. Amazon और Flipkart के लिए अब असली चुनौती है तेजी और लागत में संतुलन बनाना. आने वाला एक साल तय करेगा कि क्या ये दोनों प्लेटफॉर्म क्विक कॉमर्स को स्थायी और भरोसेमंद बना पाएंगे. अगर वे इस फेस्टिव सीजन में सफल नहीं हुए, तो शायद भविष्य में ऐसा मौका फिर न मिले. लेकिन अगर यह मॉडल काम कर गया, तो यह भारत की ऑनलाइन शॉपिंग का अनुभव पूरी तरह बदल देगा. हर ऑर्डर अब सिर्फ “10 मिनट” की दूरी पर होगा.
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