अमेरिकी कार कंपनी फोर्ड भारत में फिर वापसी कर रही है. कंपनी अपने तमिलनाडु वाले मराईमलई नगर प्लांट को दोबारा शुरू करने की तैयारी में है. इस फैक्ट्री में हाई टेक इंजन बनाए जाएंगे जो विदेश भेजे जाएंगे. भारत में इन इंजनों का इस्तेमाल नहीं होगा. फोर्ड इस प्रोजेक्ट में करीब ₹32,500 करोड़ यानी 370 मिलियन डॉलर लगा रही है यह प्लांट चार साल पहले बंद कर दिया गया था, लेकिन अब फिर से मशीनें चलेंगी यहां हर साल 2 लाख से ज्यादा इंजन बन सकेंगे कंपनी बहुत जल्द इस योजना की आधिकारिक घोषणा कर सकती है.
इंजन विदेश जाएंगे अमेरिका को नहीं भेजे जाएंगे
रिपोर्ट के मुताबिक इस प्लांट में बनने वाले इंजन अमेरिका नहीं भेजे जाएंगे अभी यह साफ नहीं है कि इन्हें किन देशों में भेजा जाएगा. यह जानकारी इस हफ्ते के अंत तक सामने आ सकती है. फोर्ड ने पिछले साल ही भारत में काम दोबारा शुरू करने की इच्छा दिखाई थी तब से इस प्लान पर काम चल रहा था. भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में व्यापार को लेकर कुछ तनाव देखने को मिला है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर 50% टैक्स लगा दिया था. इसके बावजूद फोर्ड ने भारत में फिर से प्रोडक्शन शुरू करने का फैसला लिया है. इससे पता चलता है कि भारत अभी भी दुनिया के लिए एक बड़ा उत्पादन केंद्र बनकर उभर रहा है.
भारत में फोर्ड का सफर
फोर्ड ने सबसे पहले 1995 में चेन्नई के पास अपना प्लांट लगाया था. इसके बाद कंपनी ने 2015 में गुजरात के साणंद में अपना दूसरा प्लांट शुरू किया फिर कंपनी को भारत में काफी नुकसान हुआ. करीब 2 बिलियन डॉलर का घाटा होने के बाद 2020 में फोर्ड ने भारतीय बाजार छोड़ दिया था. कंपनी ने अपने गुजरात वाले प्लांट को टाटा मोटर्स को बेच दिया. अब उसी जगह टाटा इलेक्ट्रिक गाड़ियां बना रही है. अब फोर्ड फिर से भारत में वापसी कर रही है, लेकिन इस बार फोकस केवल इंजन बनाने और उन्हें विदेश भेजने पर रहेगा कंपनी फिलहाल भारत में कार बेचने की योजना नहीं बना रही है.
तमिलनाडु बनेगा और बड़ा ऑटो हब
फोर्ड के लौटने से तमिलनाडु एक और मजबूत ऑटो हब बन जाएगा यहां पहले से Hyundai, BMW और Renault जैसे बड़े ब्रांड की फैक्ट्रियां हैं. इससे राज्य में रोजगार बढ़ेगा और छोटे उद्योगों को भी फायदा मिलेगा. अब ज्यादा लोग ऑटो सेक्टर में काम पा सकेंगे और क्षेत्र में विकास की रफ्तार भी बढ़ेगी. यह कदम भारत के लिए अच्छी खबर है क्योंकि बड़े विदेशी कंपनियां फिर भारत पर भरोसा दिखा रही हैं. इससे भारत की मैन्युफैक्चरिंग ताकत और भी मजबूत होगी.
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