धरती के 80 फीट नीचे छिपा है सोने का किला, जहां रखा है ₹5.11 लाख करोड़ का खजाना!

धरती के 80 फीट नीचे छिपी न्यूयॉर्क की गोल्ड वॉल्ट में रखा ₹5.11 लाख करोड़ का खजाना
न्यूयॉर्क के मैनहटन में 80 फीट नीचे बनी तिजोरी में रखा गया है ₹5.11 लाख करोड़ का सोना

सोने की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. आज 10 ग्राम सोना ₹1300 से ज्यादा का हो चुका है. ऐसे में हर कोई सोचता है कि अपना सोना कहां रखें घर में या बैंक के लॉकर में. लेकिन क्या आप जानते हैं, दुनिया में एक ऐसी जगह है जहां हजारों टन सोना जमीन के अंदर छिपा हुआ है? यह जगह है न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक की गोल्ड वॉल्ट, जिसे दुनिया की सबसे सुरक्षित तिजोरी माना जाता है.


80 फीट नीचे बना सोने का किला

यह तिजोरी अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मैनहटन इलाके में बनी है. यह जमीन से करीब 80 फीट नीचे, यानी समुद्र तल से भी लगभग 50 फीट नीचे है. यह वॉल्ट साल 1920 में बनाई गई थी. उस समय विश्व युद्ध के बाद देशों को अपने सोने की सुरक्षा को लेकर चिंता थी. अमेरिका ने यह तिजोरी इसलिए बनाई ताकि दूसरे देश यहां अपना सोना रख सकें और यह पूरी तरह सुरक्षित रहे.

आज इस तिजोरी में करीब 6190 मेट्रिक टन सोना रखा है. यह लगभग 57,000 सोने की ईंटों के बराबर है. पहले यहां 12,000 टन सोना था, लेकिन बाद में कुछ देशों ने अपना सोना वापस ले लिया. इसके बावजूद यह आज भी दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड वॉल्ट मानी जाती है.

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इतनी कीमत कि हिल जाए पूरी इकॉनमी

यहां रखा सोना मौजूदा रेट के हिसाब से करीब $582 बिलियन डॉलर, यानी ₹5,11,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का है. अगर यह सारा सोना एक साथ बाजार में बेच दिया जाए, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल सकती है. यह सोना केवल जमा नहीं है, बल्कि यह देशों की करेंसी को मजबूत रखने में अहम भूमिका निभाता है. पुराने समय में पैसों की कीमत सोने से तय होती थी. आज भी सोना ग्लोबल फाइनेंस की नींव माना जाता है.


सिक्योरिटी इतनी सख्त कि कोई पहुंच ही नहीं सकता

इस तिजोरी को कठोर चट्टानों को काटकर बनाया गया है. इसकी दीवारें स्टील और कैटरेट मेटल से बनी हैं जो बुलेटप्रूफ हैं. मुख्य दरवाजा करीब 90 टन वजनी है, जो हवा और पानी दोनों को रोक सकता है. अंदर 122 छोटे-छोटे कमरे (कंपार्टमेंट) हैं, जिनमें अलग-अलग देशों का सोना रखा है.

यहां से सोना निकालने या रखने के लिए कम से कम छह लोगों की मौजूदगी जरूरी होती है तीन अधिकारी, दो बैंक कर्मचारी और एक ऑडिट स्टाफ. पूरी वॉल्ट में CCTV कैमरे, मोशन सेंसर और सुरक्षा गार्ड्स 24 घंटे तैनात रहते हैं. यह तिजोरी इतनी गहराई में है कि बाढ़ या बम धमाका भी इसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता.


100 साल पुराना भरोसा आज भी कायम

1920 के दशक में जब यह तिजोरी बनी, तब देशों के पास सोना रखने की सुरक्षित जगह नहीं थी. न्यूयॉर्क को चुना गया क्योंकि यह दुनिया की फाइनेंशियल कैपिटल थी. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कई देशों ने अपना सोना यहां भेजा ताकि वह सुरक्षित रहे. 1970 के दशक तक यहां सोने की मात्रा सबसे ज्यादा थी.

आज टेक्नोलॉजी ने इस वॉल्ट की सिक्योरिटी को और मजबूत बना दिया है. अब यहां AI-बेस्ड सिक्योरिटी सिस्टम हैं जो किसी भी हलचल को तुरंत पहचान लेते हैं. इसके बावजूद यहां सबसे बड़ा नियम वही है भरोसा और पारदर्शिता. यही वजह है कि यह तिजोरी आज भी दुनिया की सबसे भरोसेमंद मानी जाती है.

न्यूयॉर्क की यह गोल्ड वॉल्ट सिर्फ एक तिजोरी नहीं, बल्कि दुनिया के भरोसे और स्थिरता का प्रतीक है. इतनी गहराई में रखा यह सोना हमें यह सिखाता है कि असली ताकत केवल पैसों या सोने में नहीं, बल्कि सुरक्षा और भरोसे में होती है. भारत के लिए भी यह उदाहरण है कि मजबूत रिजर्व और सुरक्षित सिस्टम ही किसी देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर रख सकते हैं.

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