भारत और ब्राजील के रिश्ते अब पहले से ज्यादा मजबूत हो रहे हैं. दोनों देश अब सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रक्षा Defense, ऊर्जा Energy और टेक्नोलॉजी Technology जैसे कई क्षेत्रों में भी साथ काम कर रहे हैं, यह साझेदारी आने वाले समय में दुनिया की राजनीति में बड़ा असर डाल सकती है, हाल ही में ब्राजील के उपराष्ट्रपति जेराल्डो अल्कमीन भारत दौरे पर आए. यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा लेकर आया है.
व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य, 20 अरब डॉलर का समझौता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने पहले ही तय किया था कि अगले पांच साल में दोनों देशों के बीच 20 अरब डॉलर का व्यापार Trade होगा, अब उसी दिशा में तेजी से काम हो रहा है, भारत दौरे के दौरान अल्कमीन ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की. इस दौरान दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बात की, भारत और ब्राजील के अधिकारी और उद्योग जगत अब यह देख रहे हैं कि किन सेक्टरों में साथ काम करने से दोनों को फायदा होगा, यह बातचीत दोनों देशों के रिश्तों को “ट्रेड पार्टनर” से “स्ट्रैटेजिक पार्टनर” तक ले जाने की दिशा में बड़ा कदम है.
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रक्षा क्षेत्र में बढ़ा सहयोग
भारत और ब्राजील की साझेदारी का सबसे मजबूत हिस्सा अब रक्षा सहयोग Defense Cooperation बन गया है. ब्राजील ने भारत के ‘आकाश डिफेंस सिस्टम’ में दिलचस्पी दिखाई है, इसके अलावा दोनों देश ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, डिफेंस टेक्नोलॉजी और सैन्य प्रशिक्षण में भी साथ काम करने की तैयारी कर रहे हैं.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे एक अहम मुलाकात बताया, उन्होंने कहा कि भारत-ब्राजील रक्षा साझेदारी दोनों देशों की सुरक्षा नीति Security Policy का मुख्य हिस्सा है, ब्राजील की ओर से भी संकेत मिले हैं कि वह भारत के साथ रक्षा और टेक्नोलॉजी में काम करना चाहता है, ताकि दोनों देशों को आत्मनिर्भरता Self-Reliance की दिशा में मदद मिल सके.
ब्रिक्स देशों में भारत-ब्राजील की अहम भूमिका
भारत और ब्राजील दोनों ब्रिक्स समूह BRICS Nations के अहम सदस्य हैं. अब ये देश डॉलर पर निर्भरता कम कर अपनी स्थानीय मुद्रा Local Currency में व्यापार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, इससे अमेरिकी डॉलर की पकड़ कमजोर हो सकती है, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने कहा है कि वे भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी और मजबूत बनाना चाहते हैं. उनका मानना है कि भारत और ब्राजील की साझेदारी दोनों देशों के आर्थिक विकास Economic Growth और स्थिरता Stability के लिए जरूरी है, अमेरिका लंबे समय से ब्रिक्स देशों की नीतियों से असहज रहा है, लेकिन भारत और ब्राजील का यह कदम दिखाता है कि अब देश अपनी नीति खुद तय करना चाहते हैं.
दुनिया में नई ताकत बन सकता है भारत-ब्राजील गठबंधन
भारत और ब्राजील की बढ़ती नजदीकी अमेरिका के लिए नई चुनौती बन सकती है, दोनों देश अब एक स्वतंत्र विदेश नीति Independent Foreign Policy पर आगे बढ़ रहे हैं, ब्राजील ने हाल में सोयाबीन व्यापार Soybean Trade में चीन के साथ सौदा कर अमेरिका को झटका दिया था, वहीं भारत भी ब्राजील के साथ डिफेंस ट्रेड और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप बढ़ा रहा है.
दोनों देशों की यह दोस्ती यह दिखाती है कि सहयोग और भरोसे से भी नई विश्व ताकतें बन सकती हैं, आने वाले महीनों में यह रिश्ता और गहरा हो सकता है, भारत और ब्राजील की साझेदारी सिर्फ दो देशों के बीच दोस्ती नहीं है, बल्कि एक नई विश्व शक्ति Global Power की शुरुआत है, दोनों देश साथ मिलकर विकास Development, Innovation और सुरक्षा Security के क्षेत्र में काम कर रहे हैं.
यह रिश्ते दिखाते हैं कि जब दो देश समान सोच और भरोसे के साथ आगे बढ़ते हैं, तो वे दुनिया में बदलाव ला सकते हैं, भारत-ब्राजील की यह दोस्ती आने वाले समय में पूरे विश्व के लिए एक नया उदाहरण बन सकती है.
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