चीन अमेरिका के बाद अब भारत भी उतरा कॉपर की रेस में

भारत कॉपर रेस में शामिल – भविष्य का नया गोल्ड मेटल
कॉपर बना भविष्य का मेटल – भारत अब ग्रीन एनर्जी, AI और EV की रेस में शामिल

आज दुनिया के चर्चा के केंद्र में सिर्फ दो नाम नहीं हैं  चीन और अमेरिका एक तरफ ट्रेड वॉर चल रहा है, दूसरी तरफ गोल्ड की खरीददारी बढ़ रही है लेकिन असली जंग अब कॉपर (तांबा) को लेकर है कॉपर अब सिर्फ मेटल नहीं है. यह AI, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), ग्रीन एनर्जी और डिफेंस टेक्नोलॉजी का आधार बन चुका है. यही कारण है कि हर बड़ा देश इसे लेकर रणनीति बना रहा है.


क्यों कॉपर बना भविष्य का मेटल

कॉपर हर आधुनिक तकनीक का दिल है. एक टन कॉपर से 40 कारें, 1 लाख स्मार्टफोन और 400 लैपटॉप बनाए जा सकते हैं. हर EV, सोलर पैनल, डेटा सेंटर और मिसाइल सिस्टम में इसकी जरूरत होती है गोल्ड सिर्फ लग्जरी देता है, लेकिन कॉपर असली पावर देता है. यही वजह है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी गोल्ड माइनिंग कंपनी Barrick Gold ने अब अपना नाम बदलकर Barrick Mining कर लिया है रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2035 तक कॉपर की मांग 50 मिलियन टन प्रति साल तक पहुंच जाएगी. जबकि मौजूदा सप्लाई सिर्फ 23 मिलियन टन है. मतलब हर साल लगभग 5 मिलियन टन की कमी रहेगी.

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ग्लोबल कॉपर रेस कौन है आगे?

चीन इस समय कॉपर की रेस में सबसे आगे है. वह दुनिया की स्मेल्टिंग क्षमता का 50% कंट्रोल करता है. 2030 तक दूसरा सबसे बड़ा प्रोड्यूसर बनने का लक्ष्य भी तय किया है अमेरिका अब पांचवें स्थान पर है और CHIPS Act के जरिए अपनी पुरानी माइंस को फिर से शुरू कर रहा है. रूस अफ्रीका में कॉपर उत्पादन बढ़ा रहा है. वहीं सऊदी अरब पाकिस्तान के Reko Diq Project में निवेश कर रहा है दुनिया अब सिर्फ गोल्ड या ऑयल की लड़ाई नहीं, बल्कि कॉपर की ताकत को लेकर मुकाबला कर रही है.


भारत की रणनीति और लेट एंट्री

भारत अब इस रेस में कदम रख चुका है. सरकार ने 30 क्रिटिकल मिनरल्स की पहचान की है और 20 से ज्यादा माइनिंग ब्लॉक्स एक्सप्लोरेशन के लिए खोले हैं जांबिया में भारत ने 9000 वर्ग किलोमीटर का Copper-Cobalt ब्लॉक सुरक्षित किया है. जम्मू-कश्मीर के लिथियम रिजर्व भी दुनिया के टॉप सेवन में शामिल हैं सबसे बड़ी चुनौती है स्पीड. नई माइन तैयार होने में लगभग 15–17 साल लगते हैं. सरकार अब कॉपर स्क्रैप पर इंपोर्ट ड्यूटी फ्री करने की तैयारी में है. इससे रिसाइक्लिंग के जरिए सप्लाई चेन मजबूत होगी.

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कॉपर फ्यूचर के बड़े खिलाड़ी

भारत में दो बड़ी कंपनियां इस गेम की मुख्य खिलाड़ी हैं  Hindalco Industries और Vedanta Limited Hindalco देश की आधी रिफाइंड कॉपर डिमांड पूरी करती है. Vedanta अपने स्टरलाइट यूनिट से सबसे बड़ा स्मेल्टर चलाती थी, जिसका रिवाइवल अब सरकार की प्राथमिकता में है सरकार ने एक्सप्लोरेशन बजट 8 गुना बढ़ा दिया है. भारत अब सिर्फ खरीदार नहीं, बल्कि कॉपर का निर्माता Builder बनने की दिशा में है.


आने वाला दशक और भारत की संभावनाएं

अगर योजनाएं सही ढंग से लागू हुईं, तो अगले 10 साल भारत के लिए गेम चेंजर साबित होंगे. कॉपर भारत का अगला गोल्ड बन सकता है जो देश कॉपर पर कब्जा करेगा, वही भविष्य में AI, EV और ग्रीन एनर्जी का असली लीडर बनेगा. भारत अब इस रेस में शामिल है और यह सफर आने वाले दशक का सबसे रोमांचक अध्याय बन सकता है.

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