भारतीय शेयर बाजार में इस समय बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. 25 साल बाद पहली बार घरेलू निवेशक DII विदेशी निवेशकों FII से आगे निकल गए हैं. अब भारतीय निवेशक अपनी ही कंपनियों में पहले से ज्यादा भरोसे के साथ पैसा लगा रहे हैं.ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2025 की तिमाही में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी NSE पर लिस्टेड कंपनियों में 18.26% तक पहुंच गई है. यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. वहीं विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी घटकर 16.71% रह गई है, जो पिछले 13 सालों का सबसे निचला स्तर है.
DII की बढ़त भारतीय निवेशकों का बढ़ता भरोसा
मार्च तिमाही में ही घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों FPI से ज्यादा हो गई थी. यह दिखाता है कि भारतीय निवेशक अब लंबे समय के लिए बाजार में निवेश करने का मन बना चुके हैं. दूसरी ओर विदेशी फंड मैनेजर भारत की विकास दर और शेयरों की कीमत को लेकर उलझन में हैं. इसी वजह से उन्होंने भारतीय बाजार से पैसा निकालना शुरू किया है.
म्यूचुअल फंड और SIP से बढ़ी ताकत
Asit C Mehta Intermediates के रिसर्च हेड सिद्दार्थ भामरे का कहना है कि DII और FII के बीच बढ़ता फर्क बताता है कि अब भारतीय बाजार में रिटेल निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि म्यूचुअल फंड्स में आने वाला ज्यादातर पैसा अब आम निवेशकों से आ रहा है. सितंबर तिमाही में म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी बढ़कर 10.9% हो गई, जबकि जून तिमाही में यह 10.56% थी, यह बढ़ोतरी इसलिए हुई है क्योंकि लोग अब सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान SIP के ज़रिए हर महीने नियमित रूप से निवेश कर रहे हैं. इससे बाजार को मजबूती और स्थिरता मिली है.
जुलाई से सितंबर 2025 के बीच विदेशी निवेशकों ने करीब 1.02 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे. इसी दौरान घरेलू निवेशकों ने 2.21 लाख करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. IIFL Capital Services Ltd. के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट श्रीराम वेलयुधन के अनुसार, विदेशी निवेशक इस साल ज्यादातर समय शेयर बेचते रहे हैं. वे अब अमेरिका, चीन, ताइवान और कोरिया जैसे अन्य बाजारों में निवेश कर रहे हैं. दिसंबर 2020 से विदेशी निवेश लगातार घट रहा है. तब विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 21.21% थी, जो जून 2023 में घटकर 18.96% रह गई. अब यह और कम हो चुकी है.
अब भारतीय बाजार खुद पर खड़ा
पहले जब विदेशी निवेशक पैसा निकालते थे तो शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आ जाती थी. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. प्राइम डेटाबेस ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रणव हलदिया का कहना है कि घरेलू निवेशकों के लगातार निवेश ने विदेशी बिकवाली का असर कम कर दिया है. अब भारतीय शेयर बाजार की ताकत घरेलू निवेश पर निर्भर है, न कि विदेशी पूंजी पर.
शेयर बाजार में यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है. यह दिखाता है कि भारतीय निवेशक अब बाजार की असली ताकत बन गए हैं. भारतीय निवेशक न केवल विदेशी पूंजी की जगह भर रहे हैं, बल्कि अपने निवेश से बाजार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं. यह समय भारतीय निवेशकों के आत्मविश्वास और मजबूती का है और यही भरोसा देश की आर्थिक स्थिति को और मजबूत बना रहा है.
यह भी पढ़ें – ₹7,000 करोड़ की तैयारी! एयरटेल शेयर में आ सकता है बड़ा झटका या जबरदस्त उछाल?
डिस्क्लेमर – इस न्यूज में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और मार्केट एनालिसिस पर आधारित है. द प्रोफिट नेस्ट किसी प्रकार की निवेश सलाह नहीं देता है और ना ही लेखक शेयर मार्केट निवेश करने की सलाह देता है शेयर बाजार जोखिम के अधीन है निवेश करने से पहले अपने सलाहकार से परामर्श अवश्य लें इस ले




