Lenskart IPO Zomato जैसा मुनाफा या Paytm जैसी गिरावट? निवेशक दुविधा में!

Lenskart IPO Analysis with Piyush Bansal and Stock Market Graph
Lenskart IPO

शार्क टैंक इंडिया के जज और लेंसकार्ट के फाउंडर पीयूष बंसल एक बार फिर चर्चा में हैं. वजह है उनकी कंपनी Lenskart IPO जिसे लेकर शेयर बाजार में जबरदस्त हलचल है. कंपनी की वैल्यूएशन प्रॉफिट आंकड़े और प्रमोटर गेम ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि ये मौका Zomato जैसा फायदा देगा या Paytm जैसी गिरावट.

कैसे अचानक घाटे से मुनाफे में आई लेंसकार्ट

लेंसकार्ट कई सालों तक घाटे में चलने के बाद 2025 में मुनाफे में पहुंची. FY24 में कंपनी को करीब ₹1 करोड़ का नुकसान हुआ था, लेकिन FY25 में ये आंकड़ा सीधे ₹297 करोड़ के मुनाफे में बदल गया. हालांकि रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस मुनाफे में से करीब ₹167 करोड़ एक बार का नॉन कैश फायदा था. यानी असली मुनाफा लगभग ₹130 करोड़ ही बैठता है. अब प्रमोटर स्टेटस की कहानी देखिए जुलाई 2025 में पीयूष बंसल के पास सिर्फ 5.17% शेयर थे, यानी वो प्रमोटर नहीं थे. लेकिन सेबी के नियम पूरे करने के लिए उन्होंने करीब ₹200 करोड़ का लोन लेकर पुराने इन्वेस्टर्स से ₹52 प्रति शेयर की दर पर स्टेक खरीदा और प्रमोटर बन गए. अब जब IPO लॉन्च हुआ, तो वही शेयर ₹402 प्रति शेयर के भाव से बेच रहे हैं. IPO के बाद उनका प्रमोटर स्टेटस फिर खत्म हो जाएगा. बाजार के कुछ जानकार इसे प्राइवेट में खरीदो पब्लिक को बेचो रणनीति कह रहे हैं.

वैल्यूएशन पर उठ रहे हैं बड़े सवाल

कंपनी की मौजूदा वैल्यू लगभग ₹70,000 करोड़ बताई जा रही है. इसका मतलब हुआ कि यह अपनी सालाना बिक्री के लगभग 10 गुना और मुनाफे के करीब 235 गुना P/E Ratio पर ट्रेड कर रही है. अगर असली मुनाफा ₹130 करोड़ माना जाए तो P/E Ratio 500 के पार पहुंच जाता है. तुलना के लिए देखें Titan Eye+ का P/E करीब 80, Luxottica Ray Ban, Oakley का P/E लगभग 48, जबकि Lenskart का 235 से भी ज्यादा. यानी Titan से तीन गुना और दुनिया की लीडर कंपनी Luxottica से पांच गुना ज्यादा महंगी.

बिज़नेस मॉडल और ग्रोथ 

लेंसकार्ट का बिज़नेस मॉडल मजबूत माना जाता है. यह एक D2C कंपनी है, यानी प्रोडक्ट सीधे ग्राहक तक पहुंचाती है. इसके 2700 से ज्यादा स्टोर भारत और विदेशों में हैं. इनमें लगभग 25% आउटलेट विदेशों में हैं. कंपनी खुद ही मैन्युफैक्चरिंग करती है, जिससे मुनाफा ज्यादा रहता है. भिवाड़ी और गुड़गांव में दो बड़ी फैक्ट्रियां हैं जो एक दिन में डिलीवरी की सुविधा देती हैं. लेंसकार्ट के पास अपने 14 इन हाउस ब्रांड हैं जैसे Vincent Chase और John Jacobs, जो अच्छी कमाई करवाते हैं. साथ ही कंपनी का फ्री आई टेस्टिंग और मॉडर्न डिजाइनिंग मॉडल युवा ग्राहकों में काफी पॉपुलर है.

लेंसकार्ट का मुनाफा फिलहाल सिर्फ 4.5% के आसपास है. इसके अलावा, कंपनी का लगभग 25% रॉ मटेरियल चीन से आता है, जिससे सप्लाई पर खतरा बना रहता है. बीते साल ED की जांच भी हो चुकी है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है. कंपनी तेजी से 600 700 नए स्टोर खोलने की योजना पर काम कर रही है, लेकिन इससे खर्च और रिस्क दोनों बढ़ेंगे साथ ही Titan और Reliance Group जैसे बड़े खिलाड़ी भी इस मार्केट में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. अगर डिस्काउंट ऑफर घटे तो बिक्री पर असर पड़ सकता है.

IPO का असली फायदा किसे?

कुल IPO साइज है ₹7278 करोड़, लेकिन इसमें से ₹5128 करोड़ कंपनी को नहीं मिलेंगे. ये पैसा पुराने इन्वेस्टर्स निकाल रहे हैं. यानी IPO का बड़ा हिस्सा एक्जिट प्लान जैसा दिखता है. SoftBank Premji Invest और Chiratae Ventures जैसे इन्वेस्टर्स पहले ही अपने निवेश पर कई गुना रिटर्न कमा चुके हैं.

अगर आप लिस्टिंग गेन के लिए निवेश करना चाहते हैं तो शुरुआती बढ़त संभव है क्योंकि बाजार में चर्चा तेज है. लेकिन लॉन्ग टर्म निवेश के लिए ये IPO थोड़ा महंगा सौदा लग रहा है. अगर वैल्यूएशन ₹35,000 करोड़ के करीब होता, तो डील और आकर्षक लगती. लेंसकार्ट का बिज़नेस मजबूत है, मार्केट में पोटेंशियल भी बड़ा है, लेकिन वैल्यूएशन बहुत ऊंचा है और रिटेल निवेशकों के लिए रिस्क ज्यादा. लिस्टिंग गेन की उम्मीद की जा सकती है, पर लंबे समय के लिए सोच समझकर फैसला लेना बेहतर होगा.

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डिस्क्लेमर – इस न्यूज में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और मार्केट एनालिसिस पर आधारित है. द प्रोफिट नेस्ट किसी प्रकार की निवेश सलाह नहीं देता है और ना ही लेखक शेयर मार्केट निवेश करने की सलाह देता है शेयर बाजार जोखिम के अधीन है निवेश करने से पहले अपने सलाहकार से परामर्श अवश्य लें इस ले

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