क्या आप भी म्यूच्युअल फंड में निवेश करते समय सबसे बड़े फंड को चुनते हैं? बहुत से लोग सोचते हैं कि बड़ा फंड मतलब ज्यादा सुरक्षित और बेहतर रिटर्न. लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है. म्यूच्युअल फंड का साइज हमेशा अच्छे रिटर्न की गारंटी नहीं देता.
क्यों बड़े फंड्स पर बढ़ता है निवेशकों का भरोसा
भारत में Equity Mutual Funds का बाजार तेजी से बढ़ा है. जब कोई फंड कुछ साल अच्छा परफॉर्म करता है, तो उसमें निवेश बढ़ जाता है. इससे फंड का साइज बड़ा हो जाता है और निवेशक इसे भरोसे का निशान मानने लगते हैं.
आंकड़े बताते हैं कि टॉप 10 Flexi Cap Funds के पास इस कैटेगरी की 78% संपत्ति है, जबकि टॉप 10 Large Cap Funds के पास 90% संपत्ति है. यानी ज्यादातर लोग इन्हीं बड़े फंड्स में निवेश कर रहे हैं. पिछले एक साल में यह फैसला सही भी लगा. टॉप फ्लेक्सी कैप के 7 और लार्ज कैप के 8 फंड्स ने अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया. इस वजह से निवेशकों का भरोसा और बढ़ गया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती.
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लंबी अवधि में बड़ा फंड नहीं दिखा सका दम
तीन साल के आंकड़े बताते हैं कि लार्ज कैप और फ्लेक्सी कैप फंड्स में से ज्यादातर ने बेंचमार्क को मात दी. लेकिन मिड कैप और स्माल कैप फंड्स में नतीजे उल्टे निकले. टॉप 10 मिड कैप फंड्स में से सिर्फ 4 और स्माल कैप फंड्स में भी केवल 4 ही बेंचमार्क से आगे रहे. इन बड़े फंड्स के पास अपनी कैटेगरी की 80% से ज्यादा संपत्ति है, लेकिन उनका रिटर्न कमजोर पड़ा. पांच साल के आंकड़ों में भी यही बात दिखती है. लार्ज कैप फंड्स का औसत रिटर्न 19.8% रहा, जबकि बेंचमार्क 18.5% था. फ्लेक्सी कैप फंड्स में फर्क और भी कम रहा 21.3% बनाम 20.8%. मिड और स्माल कैप फंड्स में तो बड़े फंड्स बेंचमार्क से नीचे ही रहे.
साइज बढ़ने से घटती है फुर्ती और फोकस
जैसे-जैसे किसी फंड का साइज बढ़ता है, उसे संभालना मुश्किल हो जाता है. एक 400 करोड़ का फंड उतनी तेजी से फैसले ले सकता है, जितना 4000 करोड़ वाला नहीं.
मिड और स्माल कैप फंड्स में यह दिक्कत ज्यादा होती है, क्योंकि वहां लिक्विडिटी यानी शेयर खरीदने-बेचने की सुविधा कम होती है. जब कोई बड़ा फंड छोटी कंपनियों के शेयर खरीदता या बेचता है, तो उनकी कीमतें तुरंत बदलने लगती हैं. इससे रिटर्न पर असर पड़ता है. लार्ज कैप फंड्स को यह समस्या कम होती है क्योंकि वे बड़ी और स्थिर कंपनियों के शेयर में निवेश करते हैं.
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अनुशासन और प्रोसेस से ही बनती है सफलता
कुछ बड़े फंड्स ऐसे भी हैं जिन्होंने साइज बढ़ने के बाद भी शानदार परफॉर्मेंस दी है. जैसे Nippon India Small Cap, Parag Parikh Flexi Cap, और HDFC Flexi Cap Fund. इन फंड्स ने अपने अनुशासन और निवेश प्रक्रिया को बनाए रखा और निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया.
यह फंड्स साबित करते हैं कि साइज नहीं, बल्कि प्रोसेस और अनुशासन ही सफलता की असली कुंजी हैं. बड़े फंड्स स्थिरता और कम लागत तो दे सकते हैं, लेकिन वे हमेशा ज्यादा रिटर्न नहीं देते. खासकर Mid Cap और Small Cap Funds में, बहुत बड़ा साइज रिटर्न घटा सकता है. इसलिए, अगली बार म्यूच्युअल फंड चुनते समय सिर्फ साइज पर मत जाएं. उसकी निवेश रणनीति, फंड मैनेजर का अनुभव और फंड का लगातार प्रदर्शन जरूर देखें. याद रखें, बड़ा फंड अक्सर बीते समय की सफलता दिखाता है, भविष्य की नहीं. समझदारी से चुना गया सही फंड ही असली मुनाफा दिला सकता है.
डिस्क्लेमर – इस न्यूज में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और मार्केट एनालिसिस पर आधारित है. द प्रोफिट नेस्ट किसी प्रकार की निवेश सलाह नहीं देता है और ना ही लेखक शेयर मार्केट निवेश करने की सलाह देता है शेयर बाजार जोखिम के अधीन है निवेश करने से पहले अपने सलाहकार से परामर्श अवश्य लें इस ले




