अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा. ट्रंप ने इसे “एक बड़ा कदम” बताया और कहा कि अब वह चीन (China) को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करेंगे.
भारत-रूस तेल सौदे पर ट्रंप का बयान
ट्रंप ने कहा, “मैं खुश नहीं था कि भारत रूस से तेल खरीद रहा था. लेकिन आज पीएम मोदी ने मुझे भरोसा दिया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा. यह बड़ा कदम है. अब मैं चाहता हूं कि चीन भी ऐसा करे.” यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) चौथे साल में पहुंच चुका है. ट्रंप ने कहा कि इस युद्ध में रूस ने लगभग डेढ़ मिलियन सैनिक खो दिए हैं. उन्होंने इसे एक ऐसा युद्ध बताया जो कभी होना ही नहीं चाहिए था.
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अमेरिका और भारत के रिश्ते मजबूत
ट्रंप ने आगे कहा कि उनके और पीएम मोदी के बीच “बहुत अच्छा रिश्ता” है. उन्होंने कहा, “मोदी महान व्यक्ति हैं. हमारे बीच बहुत अच्छा संबंध है. वह अपने देश से बेहद प्यार करते हैं.” यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच Trade Deal (व्यापार समझौता) की बातचीत चल रही है. उम्मीद है कि नवंबर तक इसका कोई परिणाम सामने आ सकता है. वॉशिंगटन में भारत और अमेरिका की टीमें लगातार बैठक कर रही हैं. यह पूरे घटनाक्रम को अमेरिका-भारत संबंधों में एक नए मोड़ के रूप में दिखाता है.
भारत की स्थिति पर सवाल
हालांकि, ट्रंप के इस दावे पर भारत की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने पहले ही कहा था कि भारत अपनी Energy Security (ऊर्जा सुरक्षा) को देखते हुए स्वतंत्र निर्णय लेता है. पूर्व में भी अमेरिका की ओर से ऐसे दावे किए गए थे, जिन्हें भारत ने खंडित किया था. कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, ट्रंप का यह बयान संभवतः अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gore) की भारत यात्रा के दौरान हुई बातचीत पर आधारित हो सकता है.
विश्व तेल बाजार और भारत की भूमिका
रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते दुनिया में तेल की कीमतें अस्थिर हैं. पश्चिमी देशों ने रूस पर Sanctions (प्रतिबंध) लगाए हैं, लेकिन भारत ने सस्ते दामों पर तेल खरीदकर अपनी जरूरत पूरी की है. ट्रंप ने कहा, “मैं समझता हूं कि भारत तुरंत तेल खरीदना बंद नहीं कर सकता. यह धीरे-धीरे होगा. जब युद्ध खत्म हो जाएगा, तब भारत रूस के साथ सामान्य व्यापार फिर से कर सकेगा.” ट्रंप प्रशासन अब भारत की स्थिति को पहले से बेहतर समझ रहा है. इसलिए उनका रुख इस बार ज्यादा सहयोगी दिखाई दे रहा है.
ट्रंप-मोदी मुलाकात की संभावना
नवंबर में होने वाले ASEAN Summit के दौरान पीएम मोदी और ट्रंप की मुलाकात हो सकती है. इस दौरान दोनों नेता व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा कर सकते हैं. अगर ऐसा हुआ तो यह दोनों देशों के बीच नई रणनीतिक साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है. ट्रंप का बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का विषय बना हुआ है. इससे यह साफ दिखता है कि भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते नई दिशा में बढ़ रहे हैं.
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