अमेरिका और चीन के बीच एक बार फिर अमेरिका-चीन ट्रेड वार को लेकर टकराव बढ़ गया है. पिछले कुछ दिनों से दोनों देशों के बीच माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आने वाले सामान पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. इसके जवाब में चीन ने भी सख्त प्रतिक्रिया दी और कहा कि “दबाव या धमकी के आगे झुका नहीं जाएगा.” अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात तय समय पर होगी. हालांकि, चीन के हालिया बयान के बाद इस बैठक पर सवाल खड़े हो गए हैं. अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि क्या यह बातचीत होगी या फिर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ेगा.
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चीन का साफ संदेश बराबरी से ही होगी बात
चीन ने अमेरिका को स्पष्ट कहा है कि बातचीत तभी संभव है जब दोनों देश बराबरी के आधार पर चर्चा करें. चीन का कहना है कि अगर अमेरिका यह सोचता है कि वह चीन के बिना काम चला सकता है, तो यह उसकी गलती है. वहीं चीन को भी पता है कि अमेरिका कई मामलों में उस पर निर्भर है, जैसे रेयर अर्थ मिनरल्स और टेक्नोलॉजी. चीन के मंत्रालय ने कहा कि अगर अमेरिका दबाव या धमकी के ज़रिए बात करना चाहता है, तो इसका कोई नतीजा नहीं निकलेगा. इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल बढ़ गई है. अब यह मामला सिर्फ ट्रेड वार नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक टकराव का रूप ले चुका है.
आगे बाजारों की नजरें अमेरिका-चीन पर
अमेरिका और चीन के बीच चल रहा ट्रेड वार अब दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहा है. किसी भी गलत कदम से विश्व बाजारों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है. निवेशकों को फिलहाल संयम रखना चाहिए और अफवाहों पर प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए. अगर दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू होती है, तो यह बाजारों के लिए राहत की खबर होगी. लेकिन अगर तनाव बढ़ता है, तो ग्लोबल इकॉनमी के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो सकती है.
डिस्क्लेमर – इस न्यूज में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और मार्केट एनालिसिस पर आधारित है. द प्रोफिट नेस्ट किसी प्रकार की निवेश सलाह नहीं देता है. शेयर ओर क्रिप्टो बाजार जोखिम के अधीन है निवेश करने से पहले अपने सलाहकार से परामर्श अवश्य लें इस लेख में उपयोग की गई तस्वीरें AI द्वारा तैयार की गई हैं.





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