राजनीतिक टकराव ने रोकी सरकार इकॉनमी को हर हफ्ते अरबों का नुकसान

अमेरिकी सरकार शटडाउन 2025 में प्रभावित कर्मचारी और कैपिटल बिल्डिंग
वॉशिंगटन में शटडाउन से सरकारी कामकाज ठप, कर्मचारी सैलरी से वंचित

वॉशिंगटन में एक बार फिर राजनीतिक टकराव बढ़ गया है. डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन पार्टी के बीच समझौता न होने की वजह से अमेरिकी सरकार आधिकारिक रूप से बंद (शटडाउन) हो गई है. डेमोक्रेट्स ने उस अस्थायी फंडिंग बिल को खारिज कर दिया जिसमें उनकी मुख्य मांगों को शामिल नहीं किया गया था. जैसे ही आधी रात को फंडिंग की समय सीमा खत्म हुई, सरकारी कामकाज रुक गया. यह हालात करीब सात साल बाद सामने आए हैं. पिछली बार 2018-19 में ट्रंप के कार्यकाल के दौरान सरकार पांच हफ्तों तक बंद रही थी.


सरकारी कर्मचारियों की सैलरी पर रोक

इस बार भी लाखों सरकारी कर्मचारियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है. गैर जरूरी सेवाओं में काम करने वाले कर्मचारियों को अस्थायी छुट्टी यानी फरलो (Furlough) पर भेजा गया है. उन्हें फिलहाल वेतन नहीं मिलेगा. वहीं, जरूरी सेवाओं में काम करने वालों को ड्यूटी तो करनी होगी, लेकिन उनका भुगतान भी शटडाउन खत्म होने के बाद ही होगा. कांग्रेसनल बजट ऑफिस का अनुमान है कि इस बार करीब 7.5 लाख सरकारी कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं. इससे पहले 2018 के शटडाउन में भी कई महीनों तक कर्मचारियों को सैलरी नहीं मिली थी.


कौन सी सेवाएं बंद और कौन सी चालू रहेंगी

शटडाउन के दौरान सेना, बॉर्डर सिक्योरिटी, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और कानून-व्यवस्था जैसी जरूरी सेवाएं जारी रहेंगी. हालांकि, इन कर्मचारियों को भी भुगतान बाद में किया जाएगा. वहीं, सोशल सिक्योरिटी और मेडिकेयर जैसी योजनाओं के तहत पैसे मिलते रहेंगे, लेकिन नए कार्ड और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया रोक दी गई है.

दूसरी तरफ, नेशनल पार्क्स, फूड इंस्पेक्शन, सरकारी प्री-स्कूल, स्टूडेंट लोन प्रोसेस और इमीग्रेशन सुनवाई जैसी सेवाएं बंद हो गई हैं. कई सरकारी कार्यक्रमों पर इसका सीधा असर पड़ा है. लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में भी मुश्किलें बढ़ने लगी हैं, खासकर उन सेवाओं में जिनका सीधा संबंध आम जनता से है.


अर्थव्यवस्था पर असर और राजनीतिक टकराव

अगर यह स्थिति लंबे समय तक चली तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा. हर हफ्ते ग्रोथ रेट में 0.1 से 0.2 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है. इस बार की स्थिति 2018 की तुलना में ज्यादा गंभीर मानी जा रही है क्योंकि दोनों पार्टियों के बीच किसी समझौते की उम्मीद नहीं दिख रही है.

डेमोक्रेट्स की मांग है कि बजट बिल में हेल्थकेयर सब्सिडी को शामिल किया जाए, जो साल के अंत में खत्म हो रही है. उनका कहना है कि अगर यह सुविधा खत्म हुई तो करीब 2.4 करोड़ अमेरिकी नागरिकों को महंगी हेल्थकेयर लेनी पड़ेगी. सबसे ज्यादा असर फ्लोरिडा और टेक्सास जैसे राज्यों में होगा, जहां पहले से ही स्वास्थ्य सेवाएं कमजोर हैं. रिपब्लिकन पार्टी का कहना है कि हेल्थकेयर और बजट दो अलग मुद्दे हैं और इन्हें जोड़ना सही नहीं है. दोनों पार्टियों की यह जिद अब आम लोगों के लिए परेशानी बनती जा रही है.


ट्रंप के बयान से बढ़ी गर्मी

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया है. उन्होंने कहा कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो “कई सरकारी कर्मचारियों की स्थायी छंटनी” की जा सकती है. ट्रंप ने यह भी कहा कि जिन कर्मचारियों की नौकरी जाएगी, उनमें ज्यादातर डेमोक्रेट होंगे. इस बयान के बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया है. अब तक करीब 1.5 लाख कर्मचारी रिटायरमेंट के लिए आवेदन दे चुके हैं. इससे सरकार को अनुभवी कर्मचारियों के नुकसान का खतरा है.

1981 से अब तक अमेरिकी सरकार 15 बार शटडाउन झेल चुकी है. ज्यादातर बार यह कुछ दिनों तक ही चला, लेकिन 2018-19 का शटडाउन सबसे लंबा रहा था. इस बार भी यह कब तक चलेगा, इसका कोई अंदाजा नहीं है. फिलहाल दोनों पार्टियां अपनी-अपनी शर्तों पर अड़ी हैं. अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो यह शटडाउन और लंबा खिंच सकता है. इससे न सिर्फ सरकारी कर्मचारियों और आम जनता की दिक्कतें बढ़ेंगी, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी बड़ा झटका लग सकता है.

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