वोडाफोन आइडिया Vodafone Idea को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. केंद्र सरकार ने कहा कि वह कंपनी पर लगाए गए अतिरिक्त एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू AGR बकाया की मांग पर दोबारा विचार करेगी और कानून के अनुसार आगे का कदम उठाएगी.
सरकार बोली अब कंपनी में जनता की भी हिस्सेदारी है
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की बेंच के सामने सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए. उन्होंने कहा कि पहले और अब के हालात में बड़ा फर्क आ चुका है. मेहता ने बताया कि सरकार ने वोडाफोन आइडिया में करीब 49% हिस्सेदारी ली है. उन्होंने कहा कि अब सरकार का हित कंपनी के साथ जुड़ गया है, इसलिए यह मामला जनता के हित से भी जुड़ा हुआ है.
उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी के लगभग 20 करोड़ ग्राहक हैं. ऐसे में कंपनी से जुड़ा कोई भी फैसला आम लोगों को प्रभावित करेगा. उन्होंने कहा कि कंपनी से जुड़े कुछ मामलों, जैसे ओवर इनवॉइसिंग, पर सरकार ध्यान दे रही है और सभी पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई होगी.
यह भी पढ़ें – ₹25 से ₹24,000 करोड़ तक मोहन सिंह ओबरॉय की सफलता की कहानी! खुलासा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा मामला अब नीति से जुड़ा है
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि सरकार के बड़े निवेश और करोड़ों ग्राहकों के कारण यह मुद्दा अब नीति से जुड़ा हुआ मामला बन गया है. अदालत ने कहा कि सरकार द्वारा 2016-17 के लिए अतिरिक्त AGR बकाया पर पुनर्विचार करना गलत नहीं है.
कोर्ट ने कहा कि यह फैसला न सिर्फ कंपनी के लिए बल्कि जनता के हित में भी सही रहेगा. अदालत ने माना कि सरकार को इस पर निर्णय लेने की पूरी स्वतंत्रता है.
वोडाफोन आइडिया की दलील बकाया पहले ही तय हो चुका था
वोडाफोन आइडिया ने दूरसंचार विभाग DoT की नई AGR मांग को चुनौती दी थी. कंपनी का कहना था कि उसकी देनदारी पहले ही तय हो चुकी थी, इसलिए उसे दोबारा बढ़ाया नहीं जा सकता. कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट से DoT की नई मांग को रद्द करने और वर्ष 2016 17 तक के बकाया की दोबारा समीक्षा कराने की अपील की थी.
कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और टाटा टेली सर्विसेज की याचिकाएं खारिज कर दी थीं. इन कंपनियों ने ब्याज और जुर्माने में राहत मांगी थी, लेकिन अदालत ने इसे “ग़लत” बताते हुए अस्वीकार कर दिया था.
यह भी पढ़ें – Airtel और Jio की कमाई का नया दौर शुरू, ICICI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
2019 से जारी है AGR विवाद
अक्टूबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने DoT की करीब ₹92,000 करोड़ की AGR वसूली को सही ठहराया था. इसके बाद से वोडाफोन आइडिया समेत अन्य टेलीकॉम कंपनियां राहत पाने की कोशिश कर रही हैं.
अब जब सरकार ने खुद कंपनी में हिस्सेदारी ली है और मामले पर दोबारा विचार करने की बात कही है, तो यह वोडाफोन आइडिया के लिए उम्मीद की नई किरण बन गया है. यह फैसला न सिर्फ कंपनी की वित्तीय स्थिति को सुधार सकता है, बल्कि भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में स्थिरता और निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत करेगा.




