बिना किसी फंडिंग के Zoho ने ₹8,700 करोड़ की ग्लोबल सफलता हासिल की!

बिना फंडिंग के Zoho की ₹8,700 करोड़ की ग्लोबल सफलता
चेन्नई के छोटे अपार्टमेंट से शुरू हुई Zoho आज ₹8,700 करोड़ की ग्लोबल SaaS कंपनी बन चुकी है

भारत में स्टार्टअप्स तेजी से बढ़ रहे हैं. लेकिन ज्यादातर कंपनियां मुनाफा नहीं कमा पा रही हैं. बड़े निवेशक पैसा दे रहे हैं, लेकिन Paytm, BJUS और Ola जैसी कंपनियां अभी भी घाटे में हैं. इसी बीच, Zoho जैसी कंपनी बिना किसी फंडिंग के भी दुनिया के बड़े टेक दिग्गजों को टक्कर दे रही है. आज Zoho ₹8,700 करोड़ की वैल्यू और ₹2,800 करोड़ का मुनाफा कमाती है. यह भारत और दुनिया के स्टार्टअप्स के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुकी है.


AdventNet से Zoho तक का सफर

Zoho की कहानी 1996 में शुरू हुई. इंटरनेट का दौर अपने शुरुआती चरण में था. चेन्नई के एक छोटे अपार्टमेंट में शेखर, टोनी और कुमार ने AdventNet नाम की कंपनी बनाई. यह कंपनी नेटवर्क मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर बनाती थी. यह सॉफ्टवेयर ऑफिस के सभी कंप्यूटर, सर्वर और राउटर्स को एक स्क्रीन से मॉनिटर करता था. प्रोडक्ट शानदार था, लेकिन मार्केटिंग कमजोर होने की वजह से कंपनी मुनाफा नहीं कमा पा रही थी. तभी श्रीधर वेम्बू अमेरिका की नौकरी छोड़कर कंपनी से जुड़ गए. उन्होंने नए क्लाइंट्स लाए और कंपनी की दिशा बदल दी.

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फंडिंग नहीं, सोच और स्वतंत्रता पर भरोसा

जब अन्य स्टार्टअप्स करोड़ों की फंडिंग ले रहे थे, Zoho ने निवेशकों का पैसा लेने से मना कर दिया. उनका मानना था कि निवेशक की दखल कंपनी की स्वतंत्रता योजना को प्रभावित कर सकती है. Zoho ने अपने सभी मुनाफे को रिसर्च और डेवलपमेंट में लगाया. उन्होंने सस्ते और बेहतर प्रोडक्ट बनाए. भारत में कम लागत पर वही सॉफ्टवेयर बनाया जा सकता था, जो अमेरिका में महंगा पड़ता. इस रणनीति ने Zoho को अंतरराष्ट्रीय क्लाइंट्स के लिए मजबूत बना दिया.


ManageEngine और Zoho One: बड़े और छोटे बिज़नेस के लिए समाधान

साल 2000 में जब डॉट-कॉम बबल फूटा और कई कंपनियां बंद हो गईं, तब भी Zoho ने हार नहीं मानी. कंपनी ने उस वक्त ManageEngine लॉन्च किया. यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिससे बड़ी कंपनियां अपने नेटवर्क और डेटा को आसानी से एक जगह से संभाल सकती हैं. इसके बाद Zoho ने छोटे और मध्यम बिज़नेस के लिए Zoho One बनाया. इसमें अकाउंटिंग, मार्केटिंग, इन्वेंटरी और कस्टमर मैनेजमेंट जैसे सारे ज़रूरी टूल एक साथ मिलते हैं. इससे छोटे कारोबार डिजिटल बने और उनका काम ऑटोमेटेड हो गया. यानी अब छोटे बिज़नेस भी बड़े स्तर पर टेक्नोलॉजी की मदद से काम कर पा रहे हैं.

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भारत और दुनिया के लिए प्रेरणा

आज Zoho 160 से ज्यादा देशों में काम कर रही है. यह साबित करता है कि भारत से बिना फंडिंग के भी दुनिया में बड़ा नाम बनाया जा सकता है. Zoho की कहानी नए स्टार्टअप्स के लिए एक उदाहरण है. यह दिखाती है कि अगर रणनीति सही हो, सोच लंबी अवधि की हो और काम करने की आज़ादी मिले, तो कोई भी कंपनी दुनिया में अपनी पहचान बना सकती है. Zoho का बिज़नेस मॉडल यह भी बताता है कि सिर्फ निवेशकों के मुनाफे पर ध्यान देने के बजाय, ग्राहकों की जरूरत और बाज़ार की सही समझ ही लंबे वक्त की सफलता की असली चाबी है.

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